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सोमवार, 22 अगस्त 2016

आगामी पीढ़ियों के जीवन को बचाने हेतु वृक्षारोपण जरुरी - कृष्ण कुमार यादव

वृक्षारोपण मानव समाज का वैयक्तिक और सामाजिक दायित्व है। प्राचीन काल से ही मानव और वृक्षों का घनिष्ठ सम्बन्ध रहा है। मानवीय सभ्यता-संस्कृति के आरम्भिक विकास का पहला चरण भी वन-वृक्षों  की सघन छाया में ही उठाया गया। ऐसे में उनकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य है। अपने और आने वाली पीढ़ी के जीवन को बचाने के लिए हमें वृक्षारोपण करना ही होगा। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने जवाहर नवोदय विद्यालय, तिलवासिनी, जोधपुर में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम में कहीं। इस अवसर पर श्री यादव ने पौधरोपण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। 

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि वृक्ष कभी भी हमसे कुछ नहीं लेते, सिर्फ देते हैं।  ऐसे में यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में एक पेड़ लगाने और उसे भरपूर समृद्ध करने का भी संकल्प ले ले तो पर्यावरण को सतत सुरक्षित किया जा सकता है। विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा के तहत वृक्षारोपण के बारे में बताने और उन्हें इस ओर प्रेरित करने पर भी श्री यादव ने जोर दिया। 

जवाहर नवोदय विद्यालय, तिलवासनी, जोधपुर के प्रधानाचार्य  चिंतामणि ने कहा कि हमारी परंपरा में एक वृक्ष को दस पुत्रों के सामान मन गया है, क्योंकि वृक्ष पीढ़ियों तक हमारी सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि  वृक्षारोपण और उनके रक्षण के  दायित्व का निर्वाह कर सृष्टि को भावी विनाश से बचाया जा सकता है । 

इस अवसर पर जवाहर नवोदय विद्यालय के तमाम अध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आरम्भ में बच्चों ने  पर्यावरण संरक्षण एवम इसमें वृक्षों के योगदान पर संगीतमय प्रस्तुति दी। 




विश्व आदिवासी दिवस : आदिवासियों के जीवन को बचाने के साथ-साथ उनकी भाषा और संस्कृति को भी सहेजने की जरुरत

आदिवासी जनजातियों के मानवाधिकारों के प्रति लोक के मन में सहानुभूति के भाव को जाग्रत करने के लिए उनकी जीवन सम्बन्धी चुनौतियों पर विचार करने की महती आवश्यकता को मद्देनजर रख जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर एवं एम.वी. संस्थान, जोधपुर के संयुक्त प्रयासों से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ एम.बी.एम. संस्थान के इंटरनेशनल सेमिनार हाॅल में 9 अगस्त, 2016 को किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ आदिवासी समाज व शिक्षा जगत के ख्याति प्राप्त प्रबुद्धजनों के द्वारा आदिवासियों के बलिदान के प्रतीक ‘मानगढ धाम’ की प्रतिमा के सम्मुख द्वीप प्रजज्वलन के साथ किया गया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व कस्टम कमिश्नर श्री शंकर लाल मीना ने की, मुख्य अतिथि श्री हेमराज मीना,विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय डाक सेवा के निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव रहे। संगोष्ठी के निदेशक डाॅ. जनक सिंह मीना ने बताया की संगोष्ठी का विधिवत शुभारम्भ परम्परागत तरीके से कुलगीत गान के साथ किया गया। परम्परा अनुसार अतिथिगणों को साफा पहनाकर एवं शोल ओढ़ाकर पुष्पगुच्छों के साथ अभिनन्दन किया गया। प्रो. एच.एस. राठौड़ द्वारा आगन्तुक मेहमानों एवं प्रवुद्धजनों का स्वागत किया गया। 

उद्घाटन सत्र के प्रारम्भ में संगोष्ठी की मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए सेण्ट्रल मिशिगन यूनिवर्सिटी, संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रोफेसर प्रो. विदु सोनी ने आदिवासी जनजातियों के पहचान के मुद्दे को अपना विषय बनाया और संयुक्त राष्ट्र संघ के आदिवासियों के मानवाधिकारों पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में हेमराज मीना ने आदिवासियों की दशा पर प्रकाश डाला। 

 विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं एवं साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव ने अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह में अपने प्रवास का जिक्र करते हुए वहां के आदिवासियों से जुड़े तमाम अनछुए पहलुओं की चर्चा की। आदिवासियों की समस्याओं एवं चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए उनकी बोली, भाषा, संस्कृति के संकट पर केन्द्रित किया। श्री यादव ने सचेत करते हुए कहा कि  आज इन जनजातियों के जीवन को बचाने के साथ-साथ इन बिखरी संस्कृतियों और इनके तत्वों को भी सहेजने की जरुरत है, अन्यथा संस्कृति और समाज की टूटन जनजातियों को राष्ट्र की मुख्य धारा से अलग ही कर देगी।

अध्यक्षीय उद्वोधन में शंकर लाल मीना ने व्यांगयात्मक भाषा में आदिवासियों की वास्तविक स्थिति को रेखांकित किया। इस अवसर पर आदिवासियों से सरोकार रखती हुई  डाॅ. श्रवण कुमार मीना की ‘आदिवासी कहानी विविध सन्दर्भ’, डाॅ. मन्जू गांधी की ‘खाड़ी युद्ध में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका’ एवं आदिवासी सरोकारों को समर्पित पत्रिका "अरावली उद्घोष"  का विमोचन भी किया गया। 

इस अवसर पर चन्दनमल नवल, किशोरी लाल मीना, डाॅ रमेश चन्द्र मीना, अफगानिस्तान के मोहम्मद शफीक, यू.एस.ए. से प्रो. विधू सोनी, श्री धर्मसिंह वर्मा, श्रीमति विमला वर्मा, श्री वेदव्यास, प्रो. पूनम वावा, प्रो. कान्ता कटारिया, डाॅ. मीना बरडिया, डाॅ. यादराम मीना, डाॅ. शीतल प्रसाद मीना, प्रो. सोहन लाल मीना, डाॅ. औतार लाल मीना, डाॅ. रमा आरोड़ा, प्रो. हेमन्त शर्मा इत्यादि सहित तमाम प्राध्यापक, बुद्धिजीवी, शोध छात्र उपस्थित थे। डाॅ. निधि संदल ने कार्यक्रम का संचालन किया। 
                                                                      
-डाॅ. जनक सिंह मीना
संगोष्ठी निदेशक 
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर-राजस्थान  




विश्व आदिवासी दिवस पर जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के राजनीति शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में "भारत की आदिवासी जनजातियाँ : चुनौतियाँ और संभावनाएं" विषय पर व्याख्यान देते राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव। 

आदिवासी विमर्श को समर्पित पत्रिका ''अरावली उद्घोष'' का विमोचन। 

डाॅ. श्रवण कुमार मीना की ''आदिवासी कहानी : विविध सन्दर्भ'' पुस्तक का लोकार्पण। 

आदिवासियों के बलिदान के प्रतीक ‘मानगढ धाम’ की प्रतिमा के सम्मुख द्वीप प्रजज्वलन करते राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं एवं साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव 



 International Seminar on the International Day of the World's Indigenous Peoples on 9th August, 2016 at JNVU, Jodhpur

मंगलवार, 2 अगस्त 2016

नवोदय विद्यालय समिति द्वारा आयोजित संकुल स्तरीय विज्ञान व कला प्रदर्शनी का डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने किया उद्घाटन

विज्ञान से जनसाधारण को जोड़ने के लिए जरुरी है कि इसे किताबों के पन्नों से निकालकर व्यावहारिक रूप दिया जाये। विज्ञान-प्रौद्योगिकी और नवाचार की पहुँच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित किया जाय। विज्ञान की विशिष्टता को सामान्य व्यक्ति से जोड़े बिना इसका विकास संभव नहीं है। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने नवोदय विद्यालय समिति द्वारा आयोजित संकुल स्तरीय विज्ञान एवं कला प्रदर्शनी का जवाहर नवोदय विद्यालय, तिलवासनी, जोधपुर में उद्घाटन करते हुए कहा।

मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने अपने संबोधन में कहा कि, आज के युवाओं में संवेदना के साथ-साथ नए विचारों का पोषण, रचनात्मकता और जिज्ञासु परिप्रेक्ष्य विकसित करने की जरूरत है। इनकी पहल से ही समाज में वैज्ञानिक दृष्टि, जागरूकता और प्रगतिशील विचारों का विकास होगा। विज्ञान और कला में कोई विरोधाभास नहीं है, बल्कि दोनों मिलकर ही समाज में रचनात्मक दृष्टिकोण और वैज्ञानिक मनोवृत्ति पैदा कर सकते हैं।


इस अवसर पर नवोदयी विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, वाटर हार्वेस्टिंग, पनबिजली का प्रयोग, आर्गेनिक खेती, विद्युत बचाने, रिमोट सेंसिंग, स्वच्छता अभियान जैसे तमाम उपयोगी चीजों पर मॉडल बनाकर और सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर राजस्थानी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर प्रदर्शनी प्रस्तुत की। इस अवसर पर जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, चूरू, पाली, झुञ्झुनू, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ सहित राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के दस नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों ने अपने मॉडल्स प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए विभिन्न मॉडल्स की प्रशंसा करते हुये श्री यादव ने कहा कि नवोदय विद्यालय का पूर्व छात्र होने के कारण नवोदयी विद्यार्थियों की मेधा पर मुझे पूर्ण विश्वास और गर्व है। ये ही कल के रमन, भाभा और कलाम  हैं। श्री यादव ने कहा कि आज तमाम नवोदयी विद्यार्थी देश-दुनिया में विभिन्न क्षेत्रों में नाम कमा रहे हैं।  

जवाहर नवोदय विद्यालय, तिलवासनी, जोधपुर के प्रधानाचार्य श्री चिंतामणि ने कहा कि विज्ञान एवं कला ने मानव जीवन के विकास एवं समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विद्यार्थियों को इन सबसे रूबरू कराने और  अपनी परंपराओं से जोड़ने के लिए ही इस प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। उन्होने बताया कि इस प्रदर्शनी में चयनित उत्कृष्ट मॉडल्स को राज्य स्तरीय प्रदर्शनी के लिए आगे भेजा जाएगा।

 कार्यक्र्म के आरंभ में मुख्य अतिथि श्री यादव ने पौधारोपण कर हरियाली का संदेश दिया और फिर दीप-प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तत्पश्चात विद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती-गान और स्वागत-गीत प्रस्तुत किया। जवाहर नवोदय विद्यालय, तिलवासनी, जोधपुर के प्रधानाचार्य श्री चिंतामणि ने मुख्य अतिथि के रूप में श्री यादव का स्वागत करते हुए कहा कि यह गौरव का विषय है कि नवोदय विद्यालय के ही पूर्व छात्र रहे श्री कृष्ण कुमार यादव ने आज उच्च प्रशासनिक पद पर विराजमान होते हुए यहाँ छात्र-छात्राओं की हौसला-आफजाई की।

कार्यक्रम का संचालन मनोहर सिंह और आभार ज्ञापन शोहरत हुसैन ने किया। इस अवसर पर तमाम नवोदय विद्यालय के अध्यापक, विद्यार्थिगण इत्यादि मौजूद रहे।


















































शनिवार, 23 जुलाई 2016

चन्द्रशेखर आज़ाद की 110वीं जयंती : आज़ाद था, आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा !


आज चन्द्रशेखर 'आजाद' (23 जुलाई, 1906 - 27 फरवरी, 1931) की आज 110 वीं जयंती है। ऐतिहासिक दृष्टि से भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अत्यन्त सम्मानित और लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी रहे चन्द्रशेखरआज़ाद पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल व सरदार भगत सिंह सरीखे महान क्रान्तिकारियों के अनन्यतम साथियों में से थे। 


इलाहाबाद में उनका अंतिम समय गुजरा और यहीं की मिट्टी में उन्होंने अंतिम साँस ली। आज भी कंपनी गार्डेन में लगी उनकी भव्य मूर्ति उनके जीवन को प्रतिबिंबित करती है। वाकई वो अंत तक आज़ाद ही रहे। 




अमर शहीद चन्द्र शेखर आजाद की 27 फरवरी, 1931 की अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद में पुलिस से हुई मुठभेड़ में प्रयुक्त पिस्तौल जो तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, इलाहाबाद सर जॉन नाट बावर के सौजन्य से प्राप्त हुई थी। इसे इलाहाबाद संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। 
(The pistol used by Chandra Shekhar Azad when he last time spotted in the "company garden"or Alfred park called at that time renamed Chandrashekhar Azad park)

भारत की फिजाओं को सदा याद रहूँगा 
आज़ाद था, आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा !

स्वतंत्रता संग्राम के क्रन्तिकारी नायक चन्द्रशेखर आज़ाद जी की 110वीं जयंती पर उन्हें शत-शत नमन !!

शनिवार, 21 मई 2016

फेसबुक अकाउंट

गार्डन में लैपटॉप लिए एक लड़के से बुजुर्ग दम्पति ने कहा- "बेटा हमारे लिए भी फेसबुक का एक अकाउंट बना दो।"
लड़के ने कहा- "लाइये अभी बना देता हूँ, कहिये किस नाम से बनाऊँ?"
बुजुर्ग ने कहा- "लड़की के नाम से कोई भी अच्छा सा नाम रख लो।"
लड़का ने अचम्भे से पूछा- "फेक अकाउंट क्यों ?"
बुजुर्ग ने कहा- "बेटा, पहले बना तो दो फिर बताता हूँ क्यों ?"
बड़ो का मान करना उस लड़के ने सीखा था तो उसने अकाउंट बना ही दिया।
अब उसने पूछा- "अंकल जी, प्रोफाइल इमेज क्या रखूँ?"
तो बुजुर्ग ने कहा- "कोई भी हीरोइन जो आजकल के बच्चों को अच्छी लगती हो।"
उस लड़के ने गूगल से इमेज सर्च करके डाल दी, फेसबुक अकाउंट ओपन हो गया।
फिर बुजुर्ग ने कहा- "बेटा कुछ अच्छे लोगो को ऐड कर दो।"
लड़के ने कुछ अच्छे लोगो को रिक्वेस्ट सेंड कर दी।
फिर बुजुर्ग ने अपने बेटे का नाम सर्च करवा के रिक्वेस्ट सेंड करवा दी। .
लड़का जो वो कहते करता गया जब काम पूरा हो गया तो उसने कहा...."अंकल जी अब तो आप बता दीजिये आपने ये फेक अकाउंट क्यों बनवाया?"
बुजुर्ग की आँखे नम हो गयी, उनकी पत्नी की आँखों से तो आँसू बहने लगे।
उन्होंने कहा- "मेरा एक ही बेटा है और शादी के बाद वो हमसे अलग रहने लगा। वर्षों बीत गए वो हमारे पास नहीं आता। शुरू-शुरू में हम उसके पास जाते थे तो वह नाराज हो जाता था। कहता आपको मेरी पत्नी पसंद नहीं करती। आप अपने घर में रहिये, हमें चैन से यहाँ रहने दीजिये। कितना अपमान सहते, इसलिए बेटे के यहाँ जाना छोड़ दिया। एक पोता है और एक प्यारी पोती है, बस उनको देखने का बड़ा मन करता है। किसी ने कहा कि फेसबुक में लोग अपने फैमिली की और फंक्शन की इमेज डालते हैं, तो सोचा फेसबुक में ही अपने बेटे से जुड़कर उसकी फैमिली के बारे में जान लेंगे और अपने पोता पोती को भी देख लेंगे, मन को शांति मिल जाएगी। अब अपने नाम से तो अकाउंट बना नहीं सकते। वो हमें ऐड करेगा नहीं, इसलिए हमने ये फेक अकाउंट बनवाया।"
उनकी बात सुनकर उस लड़के की आँखों में भी आँसू आ गए और वह बहुत देर तक अपलक उन्हें निहारता रह गया। 

रविवार, 15 मई 2016

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस : रिश्तों की गरमाहट को बचाने की जरूरत


आजकल हर दिन एक 'विशिष्ट दिवस' हो गया है। परिवार और समाज के सारे रिश्तों-नातों के लिए कोई न कोई दिन है। और आज है 'विश्व परिवार दिवस' । समूचे संसार में लोगों के बीच परिवार की अहमियत बताने के लिए हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने 1994 को अंतर्राष्ट्रीय परिवार वर्ष घोषित किया था। 1995 से यह सिलसिला जारी है। फ़िलहाल, भूमंडलीकरण और सूचना क्रांति के इस दौर में परिवार का दायरा बढ़ रहा है, पर भावनाएं सिमटती जा रही हैं। परिवार कुछ लोगों के साथ रहने से नहीं बन जाता। इसमें रिश्तों की एक मज़बूत डोर होती है, सहयोग के अटूट बंधन होते हैं, एक-दूसरे की सुरक्षा के वादे और इरादे होते हैं। हमारा यह दायित्व है कि परिवार, इससे जुड़े रिश्ते और पारिवारिक भावनाओं की गरिमा को बनाए रखें !! 

- कृष्ण कुमार यादव @ शब्द-सृजन की ओर 
Krishna Kumar Yadav @ http://kkyadav.blogspot.com/

शनिवार, 14 मई 2016

कृष्ण कुमार यादव "गिरिराज सम्मान" से विभूषित


प्रशासन के साथ-साथ हिंदी साहित्य और लेखन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएँ  श्री कृष्ण कुमार यादव को गगन स्वर प्रकाशन द्वारा " गिरिराज सम्मान -2016" से  सम्मानित किया गया। श्री यादव को यह सम्मान उनके रफी अहमद किदवई नेशनल पोस्टल एकेडमी, गाजियाबाद में प्रवास के दौरान गगन स्वर के सम्पादक ए. के मिश्र  ने शाल ओढ़ाकर, नारियल फल देकर  एवं प्रशस्ति पत्र देकर अभिनन्दन के साथ किया।  गौरतलब है कि श्री यादव को यह सम्मान गत माह हिंदी भवन, नई दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय साहित्यकार समारोह में पद्मभूषण डॉ. गोपाल दास नीरज द्वारा पद्मश्री डॉ. अशोक चक्रधर और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कुँवर बेचैन की सादर उपस्थिति में प्रदान किया जाना था।  पर अपनी व्यस्तताओं के चलते कार्यक्रम  शामिल न हो पाने पर डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव को यह सम्मान गाजियाबाद में उनके प्रवास के दौरान दिया गया। 

कार्यक्रम के संयोजक ए. के मिश्र  ने कहा कि, श्री कृष्ण कुमार यादव भारतीय डाक सेवा  के अत्यन्त ऊर्जस्वी और गतिमान युवा अधिकारी हैं। उच्च कोटि के चिंतक, लेखक एवं ब्लॉगर होने के साथ-साथ आपके व्यक्तित्व एवं कृतित्व की साम्यता अद्भुत एवं विलक्षण है। आपने विभिन्न विषयों पर कुल 7 पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें   'अभिलाषा' (काव्य-संग्रह) 'अभिव्यक्तियों के बहाने' व 'अनुभूतियाँ और विमर्श' (निबंध-संग्रह), India Post : 150 glorious years , 'क्रांति-यज्ञ : 1857-1947 की गाथा' , ’जंगल में क्रिकेट’ (बाल-गीत संग्रह) एवं ’16 आने 16 लोग’(निबंध-संग्रह) शामिल हैं। श्री यादव के व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी एक पुस्तक ‘‘बढ़ते चरण शिखर की ओर" (सं0 डाॅ0 दुर्गाचरण मिश्र) प्रकाशित हो चुकी  है। 

देश-विदेश से प्रकाशित तमाम पत्र पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर भी प्रमुखता से प्रकाशित होने वाले श्री कृष्ण कुमार यादव को इससे पूर्व उ.प्र. के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा ’’अवध सम्मान’’, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी द्वारा ’’साहित्य सम्मान’’, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त द्वारा ”विज्ञान परिषद शताब्दी सम्मान”,  साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, परिकल्पना समूह द्वारा ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लाॅगर दम्पति’’ सम्मान, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाॅक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’डाॅ0 अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘‘, वैदिक क्रांति परिषद, देहरादून द्वारा ‘’श्रीमती सरस्वती सिंहजी सम्मान‘’, भारतीय बाल कल्याण संस्थान द्वारा ‘‘प्यारे मोहन स्मृति सम्मान‘‘, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा ”महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला‘ सम्मान”, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती रत्न‘‘, अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनन्दन समिति मथुरा द्वारा ‘‘महाकवि शेक्सपियर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान‘‘, भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ द्वारा ’’पं0 बाल कृष्ण पाण्डेय पत्रकारिता सम्मान’’, सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु तमाम सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हो चुकी हैं।  







 प्रस्तुति :
ए. के. मिश्र 
प्रधान सम्पादक - गगन स्वर
30, रामा पार्क, निकट थाना साहिबाबाद 
गाजियाबाद -201005